DesiEvite Blog

Recently Posts

Categories

Miscellaneous

बसेरा

5/1/2017 10:45:00 PM

“बसेरा”- एक लघु कथा ज्योंहि मैंने अपने बेडरूम की खिड़की खोली,आँखें खुली की खुली रह गयीं। सामने पीले और नारंगी गुलमोहर एक कतार में लगे हवा से झूम रहे थे। साथ में दूसरे छोटे-बड़&

Posted by: Archana Anupriya

Demise of my favorite language

4/3/2017 10:18:00 PM

Demise of my favorite language(dialect).. Whose fault is it, who is to blame for it, when you see your favorite language slowly imploding by itself, How can a popular dialect can be doomed to die, when there are millions of speakers all over the world watching it slide. Bhojpuri was my mother lanuage or dialect, when I was born, I spoke it fluently as a little kid in and out of my home, When I went to my school, no one was speaking bhojpuri, even the bhojpuri kids were speaking in Hindi. What happened, some one told me, it is " lath mar" langauge, It is backward, does not have scripts or written language, There are no books, magazines, or journals in it, How can you call it a language, when there is no literature in it. I rested my case, talked to my parents and siblings in Bhojpuri at home, Sooner or later we all had our families, we were speaking Hindi or English, When kids saw us speaking in Bhojpuri, they could not figure out what it is, The youtube v

Posted by: Jay P Narain

कॉफी का प्याला

3/28/2017 7:31:00 PM

“कॉफी का प्याला” मेघा अपनी तारीफ में बोले ही जा रही थी--”मैंने अपनी जिंदगी में बहुत उतार-चढ़ाव देखे हैं, पर कभी हिम्मत नहीं हारी। दुनिया चाहती थी कि मैं टूट जाऊँ पर मैंने सबको

Posted by: Archana Anupriya

मानलेली Girlfriend

3/7/2017 10:53:00 PM

मानलेली Girlfriend . .   मानलेल्या नात्यांमध्ये एक चांगलं असतं. एका side ने मानलं कि दुसऱ्याला नाही म्हणताच येत नाही. “नाही” म्हणलं तर सभ्यपणा समजत नाहीत. तशी माधुरी माझी मानलेली Girlfriend. कि&#

Posted by: Sudhir Dharmadhikari

तेरी खातीर फरिश्ते

2/28/2017 7:33:00 PM

तेरी खातीर फरिश्ते … सर पे इल्जाम लेंगे , हुस्न कि बात चली तो,  सब तेरा नाम लेंगे , चांद आहे भरेगा  … हे गाणं माझ्या एकदा डोक्यात गुणगुण करणं  सुरु झालं कि थांबतं फक्तं कोणीत&

Posted by: Sudhir Dharmadhikari

an odd color leaf ..

2/28/2017 7:32:00 PM

an odd color leaf ..   While looking at these colorful yellow-orange-red fall leaves circling to the ground, I wonder why trees are exactly opposite of human beings.. first of all, trees give away something every day which they need everyday for living.. think of oxygen ! that is so "un-human" :)  And now the winter is close, trees are ready with colorful leafy summer clothes !.. Some have already started shedding those..  are they heading to the beach ? Surely you too need a break after working hard over summer on your job of creating shades for tired humans .. but don't you feel cold for the beach ?  Are you aware of those green guys among you ? Still green in color and green at heart, staring secretly at these colorful beauties around ? :) Trees bend as the wind blows and humans always oppose and prove their point.. and that's why trees are “always there” for us, not like human beings who "change

Posted by: Sudhir Dharmadhikari

दहेज़मुक्त भारत

2/16/2017 8:40:00 PM

पंचवर्षीय योजनाओं की तरह हमारा देश वादों और नारों पर टिका है कितने सारे कानून बेटियों के लिए बन गये बेटे फिर भी बेचे जातें हैं दहेज़ लेना स्टैट्स माने जाते हैं ---- मत करो बेटियाँ ख़रीदे हुए बेटो से शादी जहाँ उनके पौरुष मारे जाते हैं ; करो उस से शादी जिसमे पौरुष ललाम हो आत्मसम्मान ही नही देश और नारी का सम्मान हो। . माँ बनकर मत कीमत लगाओ अपने अनमोल धन को तुम शक्ति दोगी पिता भी न बेचेगा अपने रतन को देखो राम राज्य की हालत क्या हो गयी दशरथ घूम रहे व्यापारियों के वेश में कौशल्या तौल रही रामको वास्तु बाँट में आज गली गली रावण घर घर में धोबी घूम रहे राम उस समय भी न्याय नही कर सके सीता के साथ पत्नी न सही एक प्रजा के साथ- फिर क्यों हो लाचार नारी ख़रीदे हुए पति के साथ ,,---- डॉ शेफालिका वर्मा

Posted by:

My favorite Poems

11/14/2016 8:31:00 PM

 ई सिंगरहार मुठी भरि सिंगरहारी ,छिरिया गेल चारु क़ात एकटा हंसी अहांक पसरल जेना स्वर्ण प्रभात सिह्कि गेल उन्मेष नव डारि डारि पात पात लहरायल मधु बौर सन सिहरि गेल गात गात आंजुरि भरि रौद जेना जगमगायल मोन अंगना स्वप्निल ओ पुलक क्षण निसांस पीवलक चेतना आह ! ई सिंगरहार - हंसी आ कैक्टस क जिनगी काँट भरल गुलाब नेने मुसकाय रहल फुनगी !!! Shefalika Verma

Posted by: Dua

My favorite Poems

11/14/2016 7:53:00 PM

संयुक्त परिवार- संयुक्त परिवार फिर से आ गया कितना अच्छा लगता है टूटता परिवार जुट गया आदमी बेचैन था ये क्या हो गया खण्ड खण्ड हो रहा था न्यू क्लियर बनता परिवार फिर अणु अणु जुटने लगे पूरा परिवार घर में है बच्चे भरे हैं पर पूरी शांति ॐ शांति क्योंकि सबों के हाथों में मोबाइल है सभी अपने अपने में बिजी पिन ड्राप साइलेंस किसी को किसी से शिकायत नही क्योंकि सबों के हाथों में शांति मन्त्र है रसोई बनाने वाली को भी कोई हर्ज़ नही कानों में मोबाइल दबाये हाथ फटाफट चलते रहते हैं ,,,,, सच संयुक्त परिवार कितना सुखद बिना किसी हरहर खट खट शांति से अब चलते रहते हैं ,,,,, किन्तु क्या ऐसे ही होते हैं संयुक्त परिवार ,,,,,?? Shefalika Verma

Posted by: Dua

View More...
twitter account facebook account Google Plus account Pinterest account blogspot account
Copyright DesiEvite.com, 2015-2024, Contactus Email : DesiEviteAdmin@DesiEvite.com