पतंग महोत्सव

पतंग महोत्सव

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस त्यौहार को मनाया जाता है। इस त्यौहार के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं।


मकर संक्रान्ति मुख्य रूप से 'दान का पर्व' है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आख़िरी स्नान तक चलता है। मकर संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में इस त्यौहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है।


जैसा की आप सभी को बता है कि इस जनवरी मकर-संक्राति का पर्व आने वाला है और लोग बहुत सारी मस्ती करने का प्लान अभी से ही सोचने लगे हैं। गुजरात में इस पर्व को बहुत ही धूम-धाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मकर-संक्राति के इस अवसर पर अहमदाबाद में बहुत ही बड़े पैमाने पर इंटरनेशनल काईट फेस्टिवल का आयोजन किया गया है।  यह काईट फेस्टिवल गुजरात के बहुत सारे शहर में मनाया जाता है और हर जगह छोटे-छोटे कॅाम्पटिशन भी होते हैं। गुजरात में मकर-संक्राति का बहुत ही ज्यादा महत्व है और लोग बहुत ही उत्साहित रहते हैं।


ह फेस्टिवल दुनिया के बहुत से लोग को अपनी ओर अटरैक्ट करता है और खासकर गुजरात के लोगों के लिए तो बहुत ही महत्वपूर्ण फेस्टिवल है। गुजरात के लोग तो बहुत दिन पहले से ही इस फेस्टिवल का इंतज़ार करने लगते हैं। साउथ इंडिया के भी बहुत सारे हिस्से में यह फेस्टिवल एक ट्रेडिशन बन गया है। मकर-संक्राति के समय काईट फ्लाइंग मकर-संक्राति का पर्व हर साल 14-15 जनवरी को मनाया जाता है। काईट बनाने और खरीदने का सिलसिला बहुत पहले से ही शुरू हो जाता है। लोग अच्छे और बड़े छत भी खोजने लगते हैं ताकि वह खुलकर काईट उड़ सके।


अहमदाबाद के पतंग बाज़ार में बहुत सारे कलरफुल पतंग देखने को मिलते हैं और यहां बहुत ज्यादा भीड़ भी देखने को मिलेगी। इस फेस्टिवल की सबसे बड़ी बात यह होती है कि इसमें हर उम्र के लोग सम्मिलित होते हैं और बहुत मज़ा करते हैं। बहुत सारे लोग तो खुद से ही अपने पतंग बनाते हैं। इंटरनेशनल काईट फेस्टिवल मकर-संक्राति के समय अहमदाबाद के आसमान में बहुत सारे कलरफुल और तगह-तरह के आकार के पतंग देखने को मिलते हैं। काईट फेस्टिवल का कॅाम्पटिशन, साबरमती रिवर के किनारे शुरू होता है। आसमान देखने लायक होता है और लोगों के अंदर का उत्साह भी देखने लायक होता है।


लोग तरह-तरह की चीज़ों से पतंगे बनाते हैं जैसे- लकड़ी, प्लास्टिक, नाइलौन आदि। खासकर काईट फेस्टिवल के कारण लोग बहुत ही हल्के पेपर और बैम्बू का इस्तेमाल करके पतंग बनाते हैं ताकि उनकी पतंगे बहुत ऊचाई तक जा सके। इस पर्व के दिन बहुत सारे प्रकार के खाने की चीज़ों का भी आयोजन होता है। काईट फेस्टिवल बहुत ही बड़े पैमाने में मनाया जाता है और लोग बहुत ही खुश दिखाई देते हैं। इस दिन सारे लोग गिले-शिक मिटाकर एक-दूसरे से मिलते हैं।