नव वर्ष

नव वर्ष एक उत्सव की तरह पूरे विश्व में अलग अलग स्थानों पर अलग अलग विधियों से मनाया जाता है । विभिन्न सम्प्रदायों के नववर्ष भिन्न होते हैं और इसके महत्व की भी विभिन्न संस्कृतियों में परस्पर भिन्नता है । ज्य़ादातर देशों मैं नववर्ष 31 दिसम्बर को 12 बजे के बाद 1 जनवरी को मनाते है I

भारत में भी नववर्ष 1 जनवरी को मनाया जाता है पर हिन्दू शास्त्रों के अनुसार नववर्ष मार्च अप्रैल के बीच में पड़ता है I 1 जनवरी का नववर्ष अंग्रेज़ी कैलेण्डर के अनुसार मनाया जाता है I हर धर्म के अपने अपने कैलेंडर हैं पर ज्यादातर देश अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार ही नववर्ष मनाते हैं I

चीनी फरवरी में नववर्ष मनाते हैं I भारत में भी नववर्ष अलग अलग तिथियों को मनाया जाता है I 31 दिसम्बर को 12 बजे के बाद लोग आतिशबाजियां करते हैं और एक दूसरे को बधाइयाँ देते हैं I लोग इस दिन बहुत खुशियां मनाते है I

नव वर्ष के उत्सव को मनाने के लिए लोग काफी पहले से तैयारियों में जुट जाते हैं। 31 दिसंबर को रात्रि में 12 बजते ही नव वर्ष का आगमन हो जाता है। लोग आतिशबाजी छुड़ाकर खुशी का इजहार करते हैं तथा एक-दूसरे को नव वर्ष की बधाइयां देते हैं। इस अवसर पर नव वर्ष का बधाई-पत्र देने और फोन द्वारा बधाई सन्देश देने का भी काफी चलन है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। प्रायः ये तिथि मार्च और अप्रैल के महीने में पड़ती है। पंजाब में नया साल बैशाखी नाम से १३ अप्रैल को मनाई जाती है। सिख नानकशाही कैलंडर के अनुसार १४ मार्च होला मोहल्ला नया साल होता है। इसी तिथि के आसपास बंगाली तथा तमिळ नव वर्ष भी आता है। तेलगु नया साल मार्च-अप्रैल के बीच आता है। आंध्रप्रदेश में इसे उगादी (युगादि=युग+आदि का अपभ्रंश) के रूप में मनाते हैं। यह चैत्र महीने का पहला दिन होता है।

 तमिल नया साल विशु १३ या १४ अप्रैल को तमिलनाडु और केरल में मनाया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल १५ जनवरी को नए साल के रूप में आधिकारिक तौर पर भी मनाया जाता है। कश्मीरी कैलेंडर नवरेह १९ मार्च को होता है। महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में मार्च-अप्रैल के महीने में मनाया जाता है, । गुजराती नया साल दीपावली के दूसरे दिन होता है जो अक्टूबर या नवंबर में आती है। बंगाली नया साल पोहेला बैसाखी १४ या १५ अप्रैल को आता है। पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में इसी दिन नया साल होता है।

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