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Lohri

12/6/2016 7:01:00 AM

Lohri Lohri is a popular Punjabi festival, celebrated by people from the Punjab region of South Asia.The origins of Lohri are many and link the festival to Punjab region.Many people believe the festival commemorates the passing of the winter solstice as Lohri was originally celebrated on winter solstice day,being the shortest day and the longest night of the year. Lohri marks the end of winter on the last day of Paush, and beginning of Magha (around January 12 and 13), when the sun changes its course. It is associated with the worship of the sun and fire and is observed by all communities with different names, as Lohri is an exclusively Punjabi festival. Some believe that Lohri has derived its name from Loi, the wife of Sant Kabir, for in rural Punjab Lohri is pronounced as Lohi. Others believe that Lohri comes from the word 'loh', a thick iron sheet tawa used for baking chapattis for community feasts. Another legend says that Holika and Lohri were sisters. While the former p

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लोहड़ी

12/8/2016 7:41:00 AM

लोहड़ी लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) यह पर्व मनाया जाता है। यह प्राय: १२ या १३ जनवरी को पड़ता है। यह मुख्यत: पंजाब का पर्व है, लोहड़ी से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथाएँ भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से 'त्योहार' (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। यज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है। लोहड़ी से २०-२५ दिन पहले ही बालक एवं बालिकाएँ 'लोहड़ी' के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं। संचित सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है। मुहल्ले या गाँव भर के लोग अग्नि के चारों ओर आसन जमा लेते हैं। घर और व्यवसाय के कामकाज से निपटकर प्रत्येक परिवार अग्नि की परिक्रमा करता है। रेवड़ी (और कहीं कहीं मक्की के भुने दाने) अग्नि की भेंट किए जाते हैं तथा ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लो

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मकर संक्रांत

12/20/2016 7:37:00 AM

मकर संक्रांत मकर संक्रांत हा पौष महिन्यातील महत्त्वाचा सण, दरवर्षी १४ किंवा १५ जानेवारीला संक्रात येते.या दिवशी सुर्य मकर राशित प्रवेशा करतो, त्या दिवशी उत्तरायणाला प्रारंभ होतो. महिला व नववधू ज्या सणाची आवर्जून वाट पाहत असतात तो सण म्हणजे मकरसंक्रांत सूर्याला मकर संक्रमणावर आधारलेला एक हिंदुस्थानी सण वर्षभरात बारा राशीतुन सूर्याची चारा संक्रमणे होत असली तरी हिंदुस्थानवासियांच्या दृष्टीने मकरसंक्रमणाला म्हणजे संक्रांतीला अधिक महत्त्व आहे. कारण या संक्रमणापासुन सूर्याला उत्तरायणाला प्रारंभ होतो आणि उत्तर गोलार्धात राहणाऱ्या हिंदुस्थानवासीयांना उत्तरायणामध्ये अधिक प्रकाश व उष्णता याचा लाभ होतो. हिंदुस्थानात बहुतेक भागात हा सण साजरा केला जातो. दक्षिणेत याचवेळी पोंगळ (पोंगल) नावाचा तीन दिवस चालणारा उत्सव आहे. महाराष्ट्रात संक्रांतीच्या आधीच्या दिवशी भोगी असते आणि दुसऱ्या दिवशी किंक्रांत असते. स्त्रिया मृत्तिक घटाचे दान देतात व देवाला तीळ, तांदूळ अर्पण करतात आणि संक्रांतीनिमित्त सौभाग्यपण लुटतात. संक्रांतीला तिळाचे फार महत्त्व आहे. हा काळ थंडीचा असतो. त्यामुळे अंगात उष्णता निर्माण

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गुरु गोविंद सिंह जयंती

12/22/2016 7:17:00 AM

गुरु गोविंद सिंह जयंती   सिख समुदाय के दसवें धर्म-गुरु (सतगुरु) गोविंद सिंह जी का जन्म पौष शुदि सप्तमी संवत 1723 (22 दिसंबर, 1666) को पटना शहर में गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के घर हुआ। गुरु गोविंद सिंह के जन्म उत्सव को ‘गुरु गोविंद जयंती’ के रूप में मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर गुरुद्वारों में भव्य कार्यक्रम सहित गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है। अंत: सामूहिक भोज (लंगर) का आयोजन किया जाता है। खालसा पंथ के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन गुरु गोविंद सिंह जी को सिख धर्म का सबसे वीर योद्धा और गुरु माना जाता है। गुरुजी ने निर्बलों को अमृतपान करवा कर शस्त्रधारी कर उनमें वीर रस भरा। उन्होंने ही खालसा पंथ में “सिंह” उपनाम लगाने की शुरुआत की। एक वीर योद्धा होने के साथ वह एक बेहतरीन कवि भी थे। समय के अनुकूल गुरुजी ने योगियों, पंडितों व अन्य संतों के मन की एकाग्रता के लिए बेअंत बाणी की रचना की। गुरु गोविंद सिंह जी ने गुरु की पदवी को समाप्त करने “गुरु ग्रंथ साहिब” को सिखों का गुरु बनाया। गुरु गोविंद सिंह जी ने आ

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Happy New Year

12/23/2016 7:18:00 AM

Happy New Year The New Year signifies that the time has arrived to bid farewell to the by-gone year and to welcome the New Year. Traditionally, the New Year was celebrated on the first of March every year. However, this date was switched to January 1 as it is considered to have a more religious significance. With the growth of the western culture across the globe, New Year’s Day on January 1 in the Gregorian calendar has been one of India’s many celebrations.  There are different opinions as to when New Year’s Day that falls on January 1 in the Gregorian calendar was first celebrated in India. Some say that it was observed when the British colonized India while others say that its popularity bloomed only after the 1940s. People in all parts of India dress colorfully and indulge in fun filled activities such as singing, playing games, dancing, and attending parties. Night clubs, movie theatres, resorts, restaurants and amusement parks are filled with peop

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पतंग महोत्सव

12/30/2016 6:50:00 AM

पतंग महोत्सव हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस त्यौहार को मनाया जाता है। इस त्यौहार के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। मकर संक्रान्ति मुख्य रूप से 'दान का पर्व' है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आख़िरी स्नान तक चलता है। मकर संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है। भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में इस त्यौहार को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है। जैसा की आप सभी को बता है कि इस जनवरी मकर-संक्राति का पर्व आने वाला है और लोग बहुत सारी मस्ती करने का प्लान अभी से ही सोचने लगे हैं। गुजरात में इस पर्व को बहुत ही धूम-धाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। मकर-संक्राति के इस अवसर पर अहमदाबाद में बहुत ही बड़े पैमाने पर इंटरनेशनल काईट फेस्टिवल का आयोजन किया गया है।  यह काईट फेस्टिवल गुजरात के बहु

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