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My favorite Poems

11/14/2016 8:31:00 PM

 ई सिंगरहार मुठी भरि सिंगरहारी ,छिरिया गेल चारु क़ात एकटा हंसी अहांक पसरल जेना स्वर्ण प्रभात सिह्कि गेल उन्मेष नव डारि डारि पात पात लहरायल मधु बौर सन सिहरि गेल गात गात आंजुरि भरि रौद जेना जगमगायल मोन अंगना स्वप्निल ओ पुलक क्षण निसांस पीवलक चेतना आह ! ई सिंगरहार - हंसी आ कैक्टस क जिनगी काँट भरल गुलाब नेने मुसकाय रहल फुनगी !!! Shefalika Verma

Posted by: Dua

My favorite Poems

11/14/2016 7:53:00 PM

संयुक्त परिवार- संयुक्त परिवार फिर से आ गया कितना अच्छा लगता है टूटता परिवार जुट गया आदमी बेचैन था ये क्या हो गया खण्ड खण्ड हो रहा था न्यू क्लियर बनता परिवार फिर अणु अणु जुटने लगे पूरा परिवार घर में है बच्चे भरे हैं पर पूरी शांति ॐ शांति क्योंकि सबों के हाथों में मोबाइल है सभी अपने अपने में बिजी पिन ड्राप साइलेंस किसी को किसी से शिकायत नही क्योंकि सबों के हाथों में शांति मन्त्र है रसोई बनाने वाली को भी कोई हर्ज़ नही कानों में मोबाइल दबाये हाथ फटाफट चलते रहते हैं ,,,,, सच संयुक्त परिवार कितना सुखद बिना किसी हरहर खट खट शांति से अब चलते रहते हैं ,,,,, किन्तु क्या ऐसे ही होते हैं संयुक्त परिवार ,,,,,?? Shefalika Verma

Posted by: Dua