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गणतंत्र दिवस

1/18/2017 6:38:00 AM

गणतंत्र दिवस आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जाते हैं। जल, थल, वायु तीनों सेनाओं की टुकडि़यां, बैंडो की धुनों पर मार्च करती हैं। पुलिस के जवान, विभिन्न प्रकार के अस्त्र-षस्त्रों, मिसाइलों, टैंको, वायुयानो आदि का प्रदर्षन करते हुए देश के राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। सैनिकों का सीना तानकर अपनी साफ-सुथरी वेषभूषा में कदम से कदम मिलाकर चलने का दृष्य बड़ा मनोहारी होता है। यह भव्य दृष्य को देखकर मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा ह्रदय में उत्साह का संचार होता है। स्कूल, कॉलेज की छात्र-छात्राएं, एन.सी.सी. की वेशभूषा में सुसज्जित कदम से कदम मिलाकर चलते हुए यह विश्वास उत्पन्न करते हैं कि हमारी दूसरी सुरक्षा पंक्ति अपने कर्तव्य से भलीभांति परिचित हैं। मिलेट्री तथा स्कूलों के अनेक बैंड सारे वातावरण को देशभक्ति तथा राष्ट्र-प्रेम की भावना से गुंजायमान करते हैं। विभिन्न राज्यों की झांकियां वहाँ के सांस्कृतिक जीवन, वेषभूषा, रीति-रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करती हैं। अनेकता में एकता का ये परिदृष्य अति प्रेरणादायी होता है। गणतन्त्र दिवस

Posted by: kalyani

पोंगल

1/12/2017 7:35:00 AM

पोंगल   'पोंगल' दक्षिण भारत, मुख्य रूप से तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय व प्रमुख त्यौहारों में से एक है। पोंगल शब्द के दो अर्थ हैं। पहला यह कि इस दिन सूर्य देव को जो प्रसाद अर्पित किया जाता है वह पोंगल कहलाता है। दूसरा यह कि तमिल भाषा में पोंगल का एक अन्य अर्थ निकलता है अच्छी तरह उबालना। पोंगल एक फसली त्योहार है। यह त्यौहार हर साल जनवरी के मध्य में पड़ता है। जिस प्रकार ओणम् केरलवासियों का महत्त्वपूर्ण त्योहार है । उसी प्रकार पोंगल तमिलनाडु के लोगों का महत्त्वपूर्ण पर्व है । उत्तरभारत में जिन दिनों मकर सक्रान्ति का पर्व मनाया जाता है, उन्हीं दिनों दक्षिण भारत में पोंगल का त्यौहार मनाया जाता है। भारत एक कृषि प्रधान देश है । यहाँ की अधिकांश जनता कृषि के द्वारा आजीविका अर्जित करती है । आजकल तो उद्योगिकरण के साथ-साथ कृषि कार्य भी मशीनों से किया जाने लगा है । परन्तु पहले कृषि मुख्यत: बैलों पर आधारित थी । बैल और गाय इसी कारण हमारी संस्कृति में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं । भगवान शिव का वाहन यदि बैल है तो भगवान श्रीकृष्ण गोपालक के नाम से जाने जाते हैं । गायों की हमारे देश में माता के

Posted by: kalyani

Pongal

1/4/2017 2:03:00 PM

Pongal Pongal  is one of the most popular harvest festivals of South India, mainly in Tamil Nadu. It is a four- day long festival that falls in the month of 'Thai'( January- February) every year and marks the auspicious beginning of Uttarayan - the sun's journey northwards for a six-month period. The festival gets its name from a Tamil word which means 'to boil' and is held during the season when rice, cereals, sugar-cane and turmeric are harvested. 'Ponga' literally means overflowing and is named so because of the tradition of cooking the new rice in pots until they overflow, which is symbolic of abundance and prosperity. Thai Pongal is a harvest festival equivalent to a thanksgiving event celebrated by Tamils across the world. Pongal in Tamil means "boiling over or spill over." Thai Pongal is celebrated on January 14th every year. The month of Thai (January) is the harvest season in the Thamil homeland spanning from Thamil Nadu to Thamil Eelam. Pongal refe

Posted by: kalyani

लोहड़ी

12/8/2016 7:41:00 AM

लोहड़ी लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) यह पर्व मनाया जाता है। यह प्राय: १२ या १३ जनवरी को पड़ता है। यह मुख्यत: पंजाब का पर्व है, लोहड़ी से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथाएँ भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से 'त्योहार' (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। यज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है। लोहड़ी से २०-२५ दिन पहले ही बालक एवं बालिकाएँ 'लोहड़ी' के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे करते हैं। संचित सामग्री से चौराहे या मुहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाई जाती है। मुहल्ले या गाँव भर के लोग अग्नि के चारों ओर आसन जमा लेते हैं। घर और व्यवसाय के कामकाज से निपटकर प्रत्येक परिवार अग्नि की परिक्रमा करता है। रेवड़ी (और कहीं कहीं मक्की के भुने दाने) अग्नि की भेंट किए जाते हैं तथा ये ही चीजें प्रसाद के रूप में सभी उपस्थित लो

Posted by: kalyani

Lohri

12/6/2016 7:01:00 AM

Lohri Lohri is a popular Punjabi festival, celebrated by people from the Punjab region of South Asia.The origins of Lohri are many and link the festival to Punjab region.Many people believe the festival commemorates the passing of the winter solstice as Lohri was originally celebrated on winter solstice day,being the shortest day and the longest night of the year. Lohri marks the end of winter on the last day of Paush, and beginning of Magha (around January 12 and 13), when the sun changes its course. It is associated with the worship of the sun and fire and is observed by all communities with different names, as Lohri is an exclusively Punjabi festival. Some believe that Lohri has derived its name from Loi, the wife of Sant Kabir, for in rural Punjab Lohri is pronounced as Lohi. Others believe that Lohri comes from the word 'loh', a thick iron sheet tawa used for baking chapattis for community feasts. Another legend says that Holika and Lohri were sisters. While the former p

Posted by: kalyani

Konark Festival

11/29/2016 6:41:00 AM

Konark Festival Konark Dance & Music Festival started in the year 1986 at Konark Natya Mandap by its Founder-Director Padmashree Guru Gangadhar Pradhan. In a sense it can be called the harbinger of the contemporary festivals of Orissa. The sole aim behind this festival is to bring in many artistes into its cultural family and creating of international cultural amity and brotherhood. This festival has established its own unique identity in the sense that eminent artistes of national and international repute participate and perform Odissi, Kathak, Bharatnatyam, Kuchipudi, Manipuri, Mohiniattam and other classical, folk & tribal dances/music of our country on the enchanting stage of the Natyashala in the monumental Sun Temple, Konark. The stage and the atmosphere is magnified by the spiritual and aesthetic flavor, in the natural ambience of casuarinas and cashew trees. This festival is held every year from 19th to 23rd February. Konark Dance Festival is a dance festival held

Posted by: kalyani

Bikaner camel festival

11/21/2016 7:10:00 AM

Bikaner camel festival   Bikaner camel festival Camel Fair, Bikaner is a sought after event in Rajasthan. Organized by the Department of Tourism, Art and Culture, Bikaner Camel Festival is a yearly event in January that Bikaner celebrates in honor of the ship of the desert, Camel. The festivities are at par with the other celebrations of Rajasthan. The event mainly includes spectacular camel performances like camel dances, camel races, neck shaking camel rides etc. The Camel Festival in Bikaner is a two day affair. The festivities starts off with a colorful parade of beautifully adorned camels against the backdrop of majestic Junagarh Fort. Enjoy the spectacular displays of camels dressed in vibrant bridles, traditional necklace and heavy anklets showing off wonderful footwork to the lovely tunes on desert sands. Also witness the array of camel race events, camel games and other cultural performances. Hundreds and thousands of tourists and locals revel in this tradi

Posted by: kalyani

Chhath Puja

11/9/2016 8:13:00 PM

  कहते हैं दुनिया उगते सूर्य को ही प्रणाम करती है, परन्तु छठ की पूजा-विधि में पहले डूबते सूर्य की वंदना होती है जो इस पूजा को और खास बना देती है। इसके पीछे का दर्शन यह है कि "जो झुकता है, वही उठता है", अर्थात् झुके हुओं की वंदना अवश्य होनी चाहिए। अनादिकाल से चली आ रही छठ पूजा हमारी संस्कृति का द्योतक है।सूर्य एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं, सृष्टि का आधार हैं और अपनी उष्मा से जीवन का संचार करते हैं। अतः इस पर्व के माध्यम से सूर्य की भक्ति की जाती है। यह पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष की छठी तिथि को होती है और संस्कृत में छठ स्त्रीलिंग है, अतः इस पूजा को छठी मैया के व्रत के नाम से भी जाना जाता है। छठ पूजा हमारे जीवन-दर्शन से जुड़ी है। छठी मैया की जय....! .. अर्चना अनुप्रिया।

Posted by: Archana Anupriya

बाल दिवस

11/9/2016 6:42:00 AM

बाल दिवस बाल दिवस  महान नेता पं. जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिवस 14 नवंबर को मनाया जाता है।  पं. नेहरू महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका जन्म 14 नवंबर, 1889 को इलाहाबाद में हुआ था । 15 अगस्त, 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तो नेहरू जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री बने । उन्होंने देश को उन्नतिशील बनाया । उन्हें बच्चों से प्रगाढ़ लगाव था । वे बच्चों में देश का भविष्य देखते थे । बच्चे भी उनसे अपार स्नेह रखते थे । अत: उनके जन्मदिवस 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाया जाने लगा । बाल दिवस बच्चों का पर्व है । यह पर्व देश के बच्चों को समर्पित है । बच्चे देश के भविष्य हैं, अत: इनके विकास के बारे में चिंतन करना तथा कुछ ठोस प्रयास करना देश की जिम्मेदारी है । देश का समुचित विकास बच्चों के विकास के बिना संभव नहीं है । बच्चों को शिक्षित बनाने, बाल श्रम पर अंकुश लगाने, उनके पोषण का उचित ध्यान रखने तथा उनके चारित्रिक विकास के लिए प्रयासरत रहने से बच्चों का भविष्य सँवारा जा सकता है । बाल दिवस बच्चों के कल्याण की दिशा में उचित प्रयास करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है । बच्चे बाल दिवस की तैया

Posted by: kalyani

Children's Day

11/8/2016 4:50:00 PM

Children's Day 14th November is celebrated as children’s day every year. The birthday of Pandit Jawaharlal Nehru, the first prime minister of India is celebrated as Children’s Day. On this day schools organize various celebration with little kids which is fun. Children’s day (also known as Bal Divas) in India is celebrated every year on 14th of November to increase the awareness of people towards the rights, care and education of children. Children are the key of success and development of the country as they would lead their country in different and new technological way. They are adorable and shine same like the precious pearls. Children are the God gifts to their parents by the almighty. They are innocent, admirable, pure and loved by everyone. 14th of November (birthday of Pandit Jawaharlal Nehru) has been set to celebrate as children’s day all over the India. 14th of November is the birth date of the first Indian prime minister, Pandit Jawaharlal Nehr

Posted by: kalyani