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नोट का तमाशा

Monday, November 14, 2016 | 7:39:00 PM

"नोट का तमाशा"

अजीब सा तमाशा आज बाजार में चलने लगा है,
हजार का नोट अब दस रुपये के नोट से जलने लगा है...
अदना और तुच्छ समझती रही जिसे दुनिया अब तक,
देखो तो जरा, आज कैसा खुशी से उछलने लगा है!!
भारी लगते थे जो सिक्के गोरियों के कमसिन पर्स में,
अब उन्हीं सिक्कों के लिए इन्सान बेतरह मचलने लगा है..
बड़ी बड़ी जगहों पर बहुत ऐश करते रहे पाँच सौ, हजार,
अब समाज में उनका रुतबा जरा जरा पिघलने लगा है...
लुभाते रहे हर वर्ग,हर मजहब को अपने रूप से हमेशा,
ब्युटीपार्लर जाकर हर बड़ा नोट अब रूप बदलने लगा है..
छोटे नोट एक दूसरे का हाथ थामे अपनी ताकत दिखा रहे
उनकी एकता से डर, हर बड़ा नोट अब सँभलने लगा है...
नोटों की इस उठापटक से हर इन्सान परेशान हुआ है,
खुद को सुल्तान कहने वाला भी सोचने समझने लगा है...
वक्त कब किस करवट बैठे, कोई कह सकता नहीं है,
अब नोट हो या इन्सान-सब वक्त के हाथों ढलने लगा है।

अर्चना अनुप्रिया।

Posted By Archana Anupriya

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