Archana Anupriya
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नारी

Tuesday, November 15, 2016 | 8:29:00 PM

नारी

नारी की रचना से पहले विधाता ने
सोचा तो क ई बार होगा_
"इसी साहसी जीव के ऊपर संसार के
सृजन का भार होगा" ,
पर उस बनाने वाले ने तो कभी
कल्पना भी नहीं की होगी ,
कि जहाँ में जननी बनकर भी उसका
अपना ही ना कोई अधिकार होगा ।
" प्रेम,त्याग,विश्वास ,ममता की मूर्ति"_
इस रूप से तो प्यार होगा ,
लेकिन दुनिया को अपने स्वार्थ के आगे
नारी का हक ना स्वीकार होगा ।
देख नारी की दुर्दशा समाज में
ईश ने दृढ़ किया ये विचार होगा,
नारी शक्ति की पुनः स्थापना हेतु
अब बदलना यह संसार होगा ।
तभी सब ललनाएँ जाग उठी हैं,
कोई श्रम ना अब बेकार होगा,
हर घर की बेटी जब मान पाएगी
तभी तो जग में बहार होगा ।
अर्चना अनुप्रिया ।

Posted By Archana Anupriya

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