Archana Anupriya
MA,LLM, Advocate and Visiting Faculty in MS University
Love Writing and Reading

Articles/Poems/Quotes

 
Posted on: 2/24/2017 7:39:00 PM

ना आदि है, ना अंत है,
सीमाएं भी अनंत हैं,
हैं "ऊँ" के आकार में,
जिनसे सृष्टि जीवन्त है।

हर काल के कपाल हैं,
हम सबके महाकाल हैं,
विभोर भी, वीभत्स भी,
वैकुण्ठ भी हैं, पाताल हैं।

सब देवों के देव हैं,
कण-कण में एकमेव हैं,
पी के विष भी जो मगन हैं,
वह मृत्युंजय हैं, महादेव हैं।

अंधकार वही, प्रकाश वही,
मृत्यु वही और श्वास वही,
हर रचना में, हर पल में वही,
पत्थर-वृक्ष वही, हाड़-मांस वही।

जन्म और मृत्यु से परे,
सदा रहते समाधि में खड़े,
किसी भी सोच से ऊपर हैं,
अनंत शक्तियों से जड़े ।

ध्वनि में ओम् कार हैं,
हर कला का आधार हैं,
मोक्ष का सुन्दर स्वरूप हैं,
हर सत्य से एकाकार हैं।

नमन शिव, नमन हे शंकर!
हे परमपिता, हे परमेश्वर !
हम सब पर कृपा करो अपनी,
हमें सँभालो, हे करुणाकर !

हे शिव शंकर ! हे शिव शंकर !
अर्चना अनुप्रिया।
महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं.......!

Posted on: 2/21/2017 7:56:00 PM

बेजान पत्थरों में भी जान होती है...
कभी तराश कर देखो, बोल उठेंगे...।
                         अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 2/21/2017 7:16:00 PM

कीमत पानी की नहीं, प्यास की होती है..
कीमत मृत्यु की नहीं, श्वास की होती है..
संबंध तो जीवन में कई होते हैं, लेकिन..
कीमत संबंध की नहीं, उनमें छुपे विश्वास की होती है.।
अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 1/31/2017 11:17:00 PM

हे माँ शारदे, वर दे,
माँ वीणावादिनी वर दे...
मुझ अज्ञानी की वाणी को,
अपने संस्कारों से भरा स्वर दे,
माँ वीणावादिनी वर दे....।

हूँ मिट्टी की काया केवल,
मोह माया में मगन मैं,
पा लूँ तुझको अपने अंदर,
लगाऊँ कैसे ये लगन मैं ?
मेरी रूह को अपने उज्जवल
प्रकाश से भर दे...
हे माँ शारदे, वर दे
माँ वीणावादिनी वर दे...।

अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं माँ,
ना इतनी समझ है मुझमें,
बड़ी अनोखी जाल ये दुनिया,
बँधी जग के उलझन में,
मुझ निर्बल, अदना पर माँ
तू अपनी परम कृपा कर दे..
हे माँ शारदे, वर दे
माँ वीणावादिनी, वर दे...।

सच और झूठ- तू सब जानती है,
हर न्याय-अन्याय की भाषा,
तेरे हंस के इन्हीं गुणों से,
दुनिया को मिले दिलासा,
अपनी वीणा के मधुर गान से,
जग के सारे दुःख हर ले...
हे माँ शारदे, वर दे
माँ वीणावादिनी, वर दे...।
अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 1/26/2017 7:11:00 PM

खूबियों और खामियों के बीच जंग लाजिमी है,
इन्हीं दो पाटों में तो बँटा हुआ हर आदमी है,
जो जीत जाएँ फिर किस्मत वही तय करती हैं,
इनके आपस के द्वन्द्व का नाम ही तो जिंदगी है।
अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 1/26/2017 7:05:00 PM

यादें--

दोस्तों, बचपन हमारी जिंदगी का वो पड़ाव है जो हर व्यक्ति के दिल में आज भी जीवन्त है।सुकून और आनंद से भरे जीवन के उस दौर की यादें आज भी हमारे मुश्किल क्षणों में बहार लेकर आती हैं। 'उछलना, कूदना, खाना, खेलना'---जीवन मानो मस्ती के अलावा कुछ था ही नहीं। निश्छल मन, कोमल कल्पनाएँ और उन कल्पनाओं को हकीकत में बदलने के अजीब-अनोखे से तरीके...याद करके ही मन झूम उठता है।बचपन के जादुई तरीके आज भी कभी कभी हमें मुसीबतों से निकलने में सहायक बन जाते हैं। हैं ना?
तो फिर क्यों न हम आज फिर से उसी मासूमियत को जियें, उसी मस्ती में शामिल हो जाएँ और उसी निश्छलता से सबको अपना लें? शायद ऐसा करके हम आज अपने मन की सारी परेशानियाँ दूर कर सकें और एक बार फिर हमारे जीवन में बस बहार ही बहार हो।
अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 1/26/2017 6:45:00 PM

जिंदगी के सफर को आसान कर लिया...
दुश्मनों को भी अपना कद्रदान कर लिया...
मुसीबतें अब मेरे दर पर आने से खौफ खाती हैं..
उम्र के बुझते हौसलों को फिर से जवान कर लिया..।

Posted on: 1/26/2017 6:40:00 PM

हमारी अमीरी भी लाजवाब है, दोस्तों...
'प्रेम, अपनापन, संस्कार,सच्चाई, नैतिकता'...
हम वो सभी मँहगी चीजें रखते हैं..,
जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकतीं...।
..अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 1/26/2017 6:37:00 PM

प्रकृति के हर कण से हम सबके
जन्मों के नाते हैं...
हम खुशबू हमारे जीवन की
सौंधी मिट्टी से ही पाते हैं...
दुख हो या सुख हो सब साथ होते हैं
हम एक हो जाते हैं....
तभी तो हर काल में, हर युग में हम
हर त्योहार मिलकर मनाते हैं..।
अर्चना अनुप्रिया।

Posted on: 1/26/2017 6:35:00 PM

अजीब सी सोच ने हम सबको आ घेरा है...,
कभी बस "मैं" हूँ तो कभी सब "मेरा" है...।
अर्चना अनुप्रिया।

 
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